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सावधान! दशकों बाद फिर लौट रही है 'छोटी माता'
Updated Thu, 13 Mar 2014 01:26 PM IST
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इन दिनों मौसम हर रोज एक नया रूप दिखा रहा है। कभी धूप खिल जाती है तो कभी झमाझम बारिश से सड़कें नदी बन जाती हैं। कभी गर्मी लगती है तो कभी सर्दी।
एक ओर जहां इस अजीबोगरीब बदलाव से खेती को नुकसान हो रहा है वहीं ये परिवर्तन स्वास्थ्य के लिहाज से भी काफी खतरनाक है।
वैज्ञानिक भी इस परिवर्तन और हर रोज होने वाले बदलाव को लेकर चिंतित हैं।
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एक ओर जहां इस अजीबोगरीब बदलाव से खेती को नुकसान हो रहा है वहीं ये परिवर्तन स्वास्थ्य के लिहाज से भी काफी खतरनाक है।
वैज्ञानिक भी इस परिवर्तन और हर रोज होने वाले बदलाव को लेकर चिंतित हैं।
क्या कहना है वैज्ञानिकों का?
वैज्ञानिकों को डर है कि इस असंतुलन से कई भयंकर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे स्मॉल पॉक्स (छोटी माता) का खतरा एक बार फिर विकराल रूप ले सकता है।
हालांकि साल 1979 में इस भयंकर बीमारी का उन्मूलन कर दिया गया था लेकिन वैज्ञानिकों को डर है कि ये एकबार फिर पनप सकता है। हालांकि ऐसा कहने वाले वैज्ञानिकों की तादात बहुत कम है लेकिन उनकी आशंका को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
हालांकि साल 1979 में इस भयंकर बीमारी का उन्मूलन कर दिया गया था लेकिन वैज्ञानिकों को डर है कि ये एकबार फिर पनप सकता है। हालांकि ऐसा कहने वाले वैज्ञानिकों की तादात बहुत कम है लेकिन उनकी आशंका को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
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क्या है ये बीमारी?
ये एक भयंकर बीमारी है, जो संक्रामक भी है। जिसमें शरीर पर छोटे-छोटे दाने और उभार आ जाते हैं और उनकी वजह से पूरा शरीर दर्द से भर जाता है। कुछ मामले ऐसे भी आए हैं जिसमें पीड़ित अंधा हो गया और उसकी मौत हो गई।
क्या है इस आशंका का आधार?
जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि ये कहने वाले कुछ मुट्ठीभर ही वैज्ञानिक हैं लेकिन आशंका का आधार काफी हैरान करने वाला है।
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबेरिया में शरीर का गलना, इस संक्रमण की शुरुआत हो सकता है। (अगर वो व्यक्ति दूसरों के संपर्क में बना रहता है।)
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबेरिया में शरीर का गलना, इस संक्रमण की शुरुआत हो सकता है। (अगर वो व्यक्ति दूसरों के संपर्क में बना रहता है।)
अभी काफी रिसर्च की है जरूरत
विशेषज्ञों की मानें तो शरीर का इस तरह से गलना, ग्लोबल वार्मिंग की वजह से है। वैसे वैज्ञानिकों को किसी वायरस के प्रमाण तो नहीं मिले हैं लेकिन शरीर के गलने को आधार बनाकर उन्होंने ये बात कही है। (daily mail)